बिहार चुनाव से पहले विवाद: SIR प्रक्रिया में महिला मतदाताओं के नाम बड़ी संख्या में कटे

Bihar elections 1

इस साल बिहार में विधानसभा चुनाव होने जा रहा है। जिसे लेकर राजनीति की गलियों में सियासत गरमा चुका है। जब से बिहार में विधानसभा चुनाव का ऐलान हुआ है तब से एक मुद्दा जो सुर्खियां बटोर रहा है और लगातार विवाद में है वो है SIR का। आपको बता दे कि जब से चुनाव आयोग द्वारा इस निरीक्षण को करने की पहल शुरू की गई है तब से लगातार पक्ष और विपक्ष एक दूसरे पर हमलावर है। जहां दूसरी ओर कांग्रेस नेता राहुल गांधी लगातार विपक्ष पर हमला साधते हुए वोट चोरी का आरोप लगा रही है। जब से यह निरीक्षण शुरू हुआ है तब से हर एक दिन इससे जुड़ी कोई ना कोई अपडेट सामने आती है।अब बिहार में SIR की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जारी हुई अंतिम मतदाता सूची को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। आंकड़ों से साफ है कि पुरुष मतदाताओं की तुलना में महिलाओं के नाम अधिक काटे गए हैं। चुनाव आयोग का कहना है कि केवल वही नाम हटाए गए हैं, जिनके पास सही दस्तावेज उपलब्ध नहीं थे या जो ‘एब्सेंट, शिफ्टेड और डुप्लीकेट’ श्रेणी में पाए गए। लेकिन विपक्ष इसे राजनीतिक चाल बता रहा है।

महिलाओं के नाम अधिक क्यों कटे?

आंकड़ों के अनुसार 7 जनवरी 2025 को हुए SSR के बाद बिहार में कुल मतदाताओं की संख्या 7 करोड़ 80 लाख 22 हजार 933 थी। इसमें पुरुष मतदाता 4 करोड़ 7 लाख 63 हजार 352 और महिला मतदाता 3 करोड़ 72 लाख 57 हजार 477 थीं। वहीं 30 सितंबर 2025 को जारी SIR की अंतिम सूची में कुल मतदाता घटकर 7 करोड़ 41 लाख 92 हजार 357 रह गए। इनमें 3 करोड़ 92 लाख 7 हजार पुरुष और 3 करोड़ 49 लाख 82 हजार 828 महिलाएं शामिल हैं।इस प्रक्रिया में पुरुष मतदाता लगभग 15 लाख 56 हजार कम हुए, जबकि महिला मतदाताओं की संख्या 22 लाख 74 हजार तक घट गई। यानी करीब 7 लाख अधिक महिलाओं के नाम सूची से बाहर कर दिए गए। यही वजह है कि मतदाताओं का लिंगानुपात भी गिरा है। जनवरी 2025 में यह अनुपात 914 था, जो अब घटकर 892 पर पहुंच गया है।

भाकपा माले का आरोप और भाजपा का बचाव

भाकपा माले के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया महिलाओं को जानबूझकर बाहर करने के लिए अपनाई गई है। उनका कहना है कि माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के कर्ज से परेशान महिलाएं सरकार से नाराज़ हैं, इसलिए उनका नाम लिस्ट से काटा जा रहा है। भट्टाचार्य ने सवाल उठाया कि जब पुरुषों का पलायन महिलाओं से कहीं ज्यादा होता है, तो फिर महिलाओं के नाम अधिक क्यों हटाए गए?वहीं, भाजपा की ओर से प्रवक्ता कुंतल कृष्ण ने दावा किया कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से की गई है। उन्होंने कहा कि जिनके पास जरूरी दस्तावेज नहीं थे या जो शिफ्टेड और डुप्लीकेट कैटेगरी में पाए गए, केवल उन्हीं के नाम हटाए गए हैं। इसे किसी साजिश से जोड़ना गलत है।गौर करने वाली बात यह है कि पिछले दो वर्षों में SSR के दौरान महिला मतदाताओं की संख्या लगातार बढ़ रही थी। 2024 में जहां 5 लाख 78 हजार से अधिक पुरुष मतदाता जुड़े, वहीं महिलाओं की संख्या 6 लाख 30 हजार रही। 2025 के SSR में भी महिलाओं की संख्या पुरुषों से ज्यादा रही। इस बार 4 लाख 69 हजार महिलाएं सूची में जुड़ीं, जबकि पुरुष केवल 3 लाख 25 हजार ही बढ़े।अब जब SIR की प्रक्रिया में महिलाओं के नाम बड़ी संख्या में कटे हैं, तो इसका असर आगामी चुनावों पर भी देखने को मिल सकता है। आमतौर पर महिला वोटरों को एनडीए का समर्थक माना जाता है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि बदले हुए आंकड़े राजनीतिक समीकरणों को किस तरह प्रभावित करें।

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