रीढ़ विहीन, शक्ति विहीन महाशक्ति!

Sports News 4

टोक्यो वर्ल्ड एथलेटिक चैंपियनशिप में भारतीय एथलीट कोई पदक नहीं जीत पाए लेकिन भारतीय नजरिए से सबसे बड़ी खबर बस यही रही कि हमारे स्टार जेवलिन थ्रोवर और बैक टु बैक ओलम्पिक गोल्ड और सिल्वर जीतने वाले नीरज चोपड़ा ना सिर्फ खाली हाथ लौटे बल्कि हमवतन सचिन यादव से भी पिछड़ गए l नीरज आठवें स्थान पर रहे तो सचिन ने चौथा स्थान अर्जित कऱ भविष्य की उम्मीद जगाई l हालांकि नीरज चोटिल था लेकिन उसका पिछड़ना भारतीय नजरिए से खतरे की घंटी माना जा रहा है l क्योंकि चैंपियन खिलाड़ियों के लिए चोट हमेशा से बड़ी बाधा साबित होती आई है l उम्मीद है नीरज बुरे दौर से पार पाने में जल्दी कामयाब होंगे l करोड़ों देशवासियों और चाहने वालों की दुआएं उसके साथ हैं l

लेकिन कुल भारतीय प्रदर्शन पर नज़र डालें तो पदक जीतने वाले 53 देशों में भारत स्थान नहीं बना पाया l दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले देश के लिए पता नहीं कितने शर्म की बात है! हमारे खेल आका और फिजूल के दावे करने वाले सरकारी चाटुकार क्या सोचते हैं लेकिन ऐसा पहली बार नहीं हो रहा l सालों से हमारे एथलीट बड़े बड़े दावों के साथ वर्ल्ड चैंपियनशिप और ओलम्पिक में जाते हैं और (नीरज के दो पदकों को छोड़ दें तो ) खाली हाथ और अपमान के साथ लौट आते हैं l

एशियाड और कामनवेल्थ खेलों में जरूर कुछ पदक जीत जाते हैं लेकिन विख्यात और कुख्यात एथलीटों के सामने कहीं नज़र नहीं आते l बेशक़, 1960 के रोम ओलम्पिक और 24 साल बाद लासेंजल्स में क्रमश : मिल्खा सिँह और पीटी उषा ने जरूर कमाल किया लेकिन दोनों ही चौथे स्थान पर रहे l उनके बाद ऐसा कमाल देखने को नहीं मिला l आगे भी कोई उम्मीद इसलिए नज़र नहीं आती क्योंकि मिल्खा और उषा के उत्तराधिकारी हम पैदा नहीं कर पाए l नीरज भी आखिर कब तक भारतीय उम्मीदों पर खरा उतर पाएगा? तो फिर उनकी बोलती क्यों बंद है जोकि भारत को खेल महाशक्ति बनाने का दम भरते हैं? यह क्यों भूल जाते हैं कि जो देश एथलेटिक में फिसड्डी हैं उनके लिए बाकी खेलों में भी पदक जीतना आसान नहीं होगा l यूँ ही एथलेटिक को बाकी खेलों की रीढ़ और जननी नहीं कहा जाता! तो क्या हम सचमुच खेल महाशक्ति बनने की दिशा में बढ़ रहे हैं? क्या हम ओलम्पिक मेजबानी के लिए सक्षम देश हैं या यूँ ही सुर्रे छोड़ रहे हैं? आखिर कब तक हम बिना रीढ़ के जर्जर ढांचे को घसीटते रहेंगे? अब तो पीटी उषा आईओए की मुखिया हैं और आदिल सुमारीवाला और ललित भनोट जैसे ‘बड़े’ नाम एथलीटों को प्रोत्साहित कर रहे हैं तो फिर कमी कहाँ है और क्यों है? पूछता है इंडिया!

Rajender Sajwan Rajender Sajwan,
Senior, Sports Journalist
Share:

Written by 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *