नेपाल के युवा पिछले कुछ दिनों से नेपाल में उग्र प्रदर्शन कर रहे हैं। और यह प्रदर्शन इतना भयावह रूप ले चुका है कि वहां के युवा को शांत करना सरकार के हाथ से बेकाबू है। Gen Z युवाओं ने प्रदर्शन के दौरान संसद भवन, कोर्ट, और जितने भी सरकारी संस्था है सभी को आग लगाकर जला दिया। और यह प्रदर्शन यही नहीं रुक यह प्रदर्शन दिन वह दिन बराबर रूप लेता जा रहा है और न जाने कितने लोग इसे प्रदर्शन की बलि चढ़ रहे हैं।नेपाल इस समय भ्रष्टाचार और आर्थिक असमानता के खिलाफ उठे जेन-ज़ी प्रदर्शनों की वजह से गंभीर संकट से गुजर रहा है। अब तक 72 लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें 59 प्रदर्शनकारी, तीन पुलिसकर्मी और 10 कैदी शामिल हैं। जेल से भागने की कोशिश में मारे गए कैदियों की घटना ने हालात को और भी जटिल बना दिया है।
शहीद का दर्जा और मुआवजा
आपको बता दे की कुछ दिन पहले नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली नेपाल में सोशल मीडिया ऐप पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बाद नेपाल के युवा सर को पर उतर आए और प्रदर्शन शुरू कर दी। हालांकि उसके कुछ समय बाद प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। मगर यह प्रदर्शन नहीं रुका । जिसके बाद देश की पहली महिला अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने कार्यभार संभालते ही बड़ा ऐलान किया। उन्होंने घोषणा की कि 8 सितंबर को जिन लोगों की मौत हुई, उन्हें “शहीद” माना जाएगा। उनके परिजनों को 10 लाख नेपाली रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। साथ ही सरकार ने आश्वासन दिया है कि घायल प्रदर्शनकारियों का पूरा इलाज मुफ्त कराया जाएगा और उन्हें भी आर्थिक मदद मिलेगी। कार्की ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार मृतकों के शवों को उनके गृह जिलों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी उठाएगी।73 वर्षीय कार्की ने साफ शब्दों में कहा कि उनकी सरकार केवल छह महीने के लिए बनी है। उनका उद्देश्य सत्ता में बने रहना नहीं, बल्कि हालात को सामान्य करना और जनता का विश्वास बहाल करना है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार की जांच, शासन व्यवस्था में सुधार और लोगों की उम्मीदों को पूरा करना ही इस अंतरिम सरकार की प्राथमिकता होगी।नेपाल में यह अभूतपूर्व आंदोलन तब शुरू हुआ जब सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगाया। पहले से भ्रष्टाचार और बेरोजगारी से परेशान युवाओं ने इसे सीधा हमला माना और बड़ी संख्या में सड़कों पर उतर आए। यह आंदोलन जल्दी ही पूरे देश में फैल गया और इसे “युवा पीढ़ी का आंदोलन” कहा जाने लगा।
नेपाल की पहली महिला प्रधानमंत्री
सुशीला कार्की को नेपाल की पहली महिला प्रधानमंत्री बनने का गौरव प्राप्त हुआ है। इससे पहले वे देश की मुख्य न्यायाधीश रह चुकी हैं। कार्की का कहना है कि यह आंदोलन नेपाल की राजनीति और समाज के सामने नई चुनौतियां पेश कर रहा है, और सरकार की जिम्मेदारी है कि इनसे निपटकर जनता को राहत दी जाए।प्रदर्शनों के दौरान जेलों में भी हिंसा भड़क गई, जिसके चलते हजारों कैदी फरार हो गए। नेपाल पुलिस ने जानकारी दी है कि अब तक 3723 कैदी दोबारा गिरफ्तार किए जा चुके हैं। हालांकि अभी भी 10,320 कैदी फरार हैं। पुलिस और सेना का संयुक्त अभियान इन्हें पकड़ने के लिए लगातार जारी है। कई कैदी खुद लौट आए जबकि कई भारत भागने की कोशिश के दौरान पकड़े गए।
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