देर से ही सही -भारतीय फुटबाल के खैरख्वाहों को अक्ल आई और नतीजा सामने है l खालिद जमील की कोचिंग में भारत ने सालों बाद किसी अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में सम्मानजनक स्थान अर्जित कर यह दिखा दिया है कि अपने कोचों की अनदेखी का भारतीय फेडरेशन का फैसला सरासर गलत था l पिछले डेढ़ दशक से भी अधिक समय से विदेशी कोच भारतीय खिलाड़ियों को सिखाते पढ़ाते रहे लेकिन स्तर सुधर नहीं पाया l खालिद जमील के पदभार सँभालने के बाद पहले ही टूर्नामेंट में बहुत कुछ बदल गया है l सबसे बड़ा बदलाव यह रहा है कि टूर्नामेंट में भाग ले रही टीमों में फीफा रैकिंग में सबसे नीचे की टीम भारत ने सालों बाद तीसरे स्थान तक का सफर तय किया है l खासकर, ऊँचे रैकिंग वाले ओमान को हरा कर तीसरा स्थान अर्जित करना शानदार रहा l
सीएएफए नेशन्स कप में काँस्य पदक जीतना इसलिए बड़ी उपलब्धि माना जा सकता है क्योंकि कई सालों बाद भारतीय फुटबाल ने हल्की फुलकी क़ामयाबी हासिल की हैl बेशक़, अपनी फुटबाल के प्रति उसके चाहने वालों का नज़रिया काफी हद तक बदल रहा है l सप्ताह भर पहले फुटबाल प्रेमी और मीडिया भारतीय फुटबाल को कोस रहे थेl खासकर ए आई एफएफ को बुरा भला कहा जा रहा था, जिसने देश की फुटबाल को बर्बाद करने में बड़ी भूमिका निभाई है l लेकिन सप्ताह भर में नज़रिया बदल गया लगता है l टीम के प्रदर्शन पर फेडरेशन मुफ्त की वाह वाह लूट रही है तो चीफ कोच खालिद का गुणगान ऐसे किया जा रहा है जैसे सालों पहले 1951 और 1960 के एशियाई खेलों में गोल्ड जीतने वाले भारत के महान कोच सैयद अब्दुल रहीम का हुआ था l लेकिन रहीम तक पहुँचने में खालिद को लम्बा सफर तय करना है l
हालांकि खालिद और उसके खिलाड़ियों को अभी बहुत कुछ साबित करना है लेकिन विदेशी का मोह त्यागने और अपनों पर भरोसा सही निर्णय साबित हुआ है l फ़िरभी कोई भी दावा करना जल्दबाजी होगी लेकिन भारतीय फुटबाल के स्टार स्ट्राइकर और सबसे ज्यादा गोल दागने वाले भरोसेमंद स्ट्राइकर सुनील क्षेत्री की वापसी अब शायद ही हो l ऐसा तब ही हो सकता है यदि खालिद की टीम इसी प्रकार उलट फेर करती रहे और आगामी एशिया कप और एशियाड में बढ़ चढ़ कर प्रदर्शन करे l फिलहाल, देश में सालों बाद फुटबाल का माहौल फिर से बनता नज़र आ रहा है l लेकिन अभी कुछ भी भविष्यवाणी करना ठीक नहीं होगा l
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Rajender Sajwan, Senior, Sports Journalist |
