New Delhi: भारत की अग्रणी महिला मैराथन तैराक और ‘भारत की जलपरी’ के नाम से मशहूर डॉ. मीनाक्षी पाहुजा का आज जन्मदिन है। वह न केवल तैराकी के क्षेत्र में देश का नाम रोशन कर चुकी हैं बल्कि शिक्षा और सामाजिक सेवा में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। वर्तमान में वह दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी श्रीराम कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं। साल 2018 में उन्हें पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद द्वारा महिला शक्ति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
बचपन से ही दिखी असाधारण प्रतिभा
डॉ. मीनाक्षी पाहुजा की तैराकी यात्रा बहुत कम उम्र में शुरू हो गई थी। पाँच साल की उम्र में उन्होंने तैराकी शुरू की और महज नौ वर्ष की उम्र में जूनियर चैंपियन बन गईं। ग्यारह साल की उम्र से पहले ही वह तीन बार राष्ट्रीय चैंपियन का खिताब जीत चुकी थीं। दिल्ली के मॉडर्न स्कूल में पढ़ाई के दौरान उनके दिवंगत पिता और जुझारू कोच ने उन्हें मैराथन तैराकी की ओर प्रेरित किया।
अद्वितीय उपलब्धियाँ और सामाजिक योगदान
उनकी मेहनत और समर्पण ने उन्हें तीन बार लिम्का बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स में जगह दिलाई, जो 2013, 2016 और 2018 में दर्ज हुए। तैराकी के अलावा वह समाज सेवा में भी सक्रिय रही हैं। विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों के साथ मिलकर वह बच्चों को शिक्षा और खेल के लिए प्रोत्साहित करती हैं। साथ ही, दिव्यांग बच्चों के लिए बेहतर शैक्षणिक सुविधाओं की वकालत भी करती हैं। उनकी यह कोशिशें उन्हें एक संवेदनशील सामाजिक कार्यकर्ता और सच्ची प्रेरणा बनाती हैं।
साचिबात परिवार की शुभकामनाएं
डॉ. मीनाक्षी पाहुजा की यह यात्रा हर युवा के लिए एक मिसाल है। उनके जन्मदिन के अवसर पर साचिबात परिवार की ओर से उन्हें हार्दिक शुभकामनाएँ। हम प्रार्थना करते हैं कि वह यूं ही नई ऊँचाइयाँ हासिल करती रहें और समाज व देश को प्रेरित करती रहें।
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Ms. Pooja, |
