New Delhi: ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की ओर से हुए लगातार ड्रोन हमलों को भारतीय सुरक्षा बलों ने नाकाम कर दिया। हालांकि, इस अनुभव ने भविष्य में ड्रोन हमलों से निपटने के लिए सुरक्षा एजेंसियों को नई रणनीतियाँ और तैयारियाँ करने के लिए प्रेरित किया। इसी दिशा में बीएसएफ ने बड़ा कदम उठाया है।
टेकनपुर में ड्रोन वॉरफेयर स्कूल की स्थापना
बीएसएफ ने मध्य प्रदेश के टेकनपुर में स्कूल ऑफ ड्रोन वॉरफेयर की स्थापना की है। यह देश का पहला व्यवस्थित संस्थान है, जहाँ ड्रोन वॉरियर्स और ड्रोन कमांडोज़ को प्रशिक्षित किया जाएगा। इसे फर्स्ट लाइन ऑफ डिफेंस कहे जाने वाले सीमा प्रहरियों की क्षमताओं को आधुनिक बनाने के उद्देश्य से शुरू किया गया है।
विशेष पाठ्यक्रमों से होगा प्रशिक्षण
इस अत्याधुनिक संस्थान में पाँच विशेष पाठ्यक्रमों के माध्यम से जवानों को प्रशिक्षित किया जाएगा। फिलहाल यह सुविधा केवल बीएसएफ के अधिकारियों और जवानों तक सीमित होगी, लेकिन भविष्य में अन्य केंद्रीय पुलिस बलों के लिए भी प्रशिक्षण की संभावना है। यहाँ यूएवी संचालन, एंटी-ड्रोन वॉरफेयर, निगरानी और खुफिया जानकारी जुटाने से जुड़े कौशल सिखाए जाएंगे।
आधुनिक तकनीक से लैस सुविधाएँ
टेकनपुर स्थित यह संस्थान अत्याधुनिक तकनीक से सुसज्जित होगा। इसमें ड्रोन संचालन की कक्षाओं के अलावा सिमुलेटर, लाइव फ्लाइंग ज़ोन, पेलोड इंटीग्रेशन, नाइट ऑपरेशन ट्रेनिंग और एंटी-ड्रोन रणनीतियाँ शामिल होंगी। जवानों को आरएफ जैमर और काइनेटिक इंटरसेप्टर के इस्तेमाल की बारिकियां भी सिखाई जाएंगी।
एआई और मशीन लर्निंग का महत्व
बीएसएफ के महानिदेशक दलजीत सिंह चौधरी ने कहा कि भविष्य की सीमा सुरक्षा तकनीक पर आधारित होगी। रूस-यूक्रेन युद्ध और ऑपरेशन सिंदूर के अनुभव ने यह साफ कर दिया है कि एंटी-ड्रोन युद्धकला में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग की भूमिका अहम है। इसी दृष्टिकोण से यह संस्थान स्थापित किया गया है।
सीमा सुरक्षा में तकनीकी सशक्तिकरण
ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान ने तुर्की और चीन से प्राप्त ड्रोन का इस्तेमाल किया था। इन हमलों को भारतीय बलों ने नाकाम किया, लेकिन इसने ड्रोन युद्धकला में पारंगत होने की आवश्यकता को उजागर किया। टेकनपुर का यह स्कूल बीएसएफ को आधुनिक खतरों से निपटने के लिए तकनीकी रूप से सशक्त बनाएगा।
आईआईटी कानपुर के साथ साझेदारी
बीएसएफ ने ड्रोन तकनीक को मजबूत बनाने के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर के साथ समझौता किया है। इसके तहत काउंटर-यूएवी तकनीक, ड्रोन फॉरेंसिक, अनुसंधान और प्रशिक्षण में क्षमताएं बढ़ाई जाएंगी। बीएसएफ ने हाल ही में अपना पहला ड्रोन स्क्वाड्रन भी बनाया है। इस सहयोग से भविष्य में हवाई खतरों से निपटने की रणनीतियाँ और भी प्रभावी होंगी।
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Ms. Pooja, |
