कुछ दिनों पहले सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली NCR समेत कई इलाकों के स्ट्रीट डॉग्स को लेकर बड़ा फैसला सुनाया था। सुप्रीम कोर्ट ने डॉग बाइट्स की बढ़ती घटना और डॉग बाइट से हो रही है मौत के आंकड़ों का हवाला देते हुए या फैसला सुनाया था। हालांकि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद से देश भर में विवाद शुरू हो गया। सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि सभी आवारा कुत्तों को शेल्टर होम में अब से रखा जाएगा। इसके बाद से ही देश भर में विवाद शुरू हो गया था और विवाद अभी भी थमता नहीं दिख रहा है। पशु अधिकार कार्यकर्ताओं और डॉग्स प्रेमियों का कहना है कि यह निर्णय समाज में असंतुलन पैदा करेगा। लोगों का कहना है कि यह समाज जितना हम इंसानों का है उतना ही उन जानवरों का भी है जो हमारे समाज का कहीं ना कहीं एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह पृथ्वी सभी के लिए बना है जितना हक इस पर इंसानों का है उतना ही उन जानवरों का भी है।
कांग्रेस नेता प्रबल प्रताप शाही का बड़ा बयान
जब से यह फैसला सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया है तब से देश भर में लोगों में आक्रोश दिखाई दे रहा है। लोग जमकर सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का विरोध कर रहे हैं और सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन भी कर रहे हैं। अब इस पर कांग्रेस नेता और सामाजिक कार्यकर्ता प्रबल प्रताप शाही का बड़ा बयान सामने आया है। कांग्रेस नेता प्रबल प्रताप शाही ने इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि गली के कुत्ते अक्सर गरीब और कमजोर वर्गों के लोगों के लिए साथी तथा रक्षक होते हैं। उन्होंने सवाल उठाया की महंगी और विदेशी नस्ल के कुत्तों को तो किसी तरह की रोक-टोक नहीं है। लेकिन बेघर असहाय कुत्तों को जबरन हटाने का फरमान जारी कर दिया है। आगे शाही ने कहा कि यह साफ तौर पर असमानता को दर्शाता है।
शाही ने इसे पक्षपाती निर्णय बताया
प्रबल प्रताप शाही ने कहा कि यह पूरा मामला शक्ति प्रदर्शन जैसा प्रतीत होता है। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय और अन्य उच्च संस्थानों से अपील की की इस विषय पर गंभीरता से विचार किया जाए और न्याय पूर्वक समाधान निकाला जाए। इसी मुद्दे को लेकर गुरुवार को पशु प्रेमियों ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी बात रखी। उनका कहना है कि वह सरकार के साथ मिलकर आवारा कुत्तों के नसबंदी कार्यक्रम और भोजन की व्यवस्था करने को तैयार है। लेकिन प्रशासन उनकी अनदेखी कर रहा है। प्रिया चोपड़ा ने बताया कि कई लोग बिना किसी शुल्क के रोजाना कुत्तों को खाना उपलब्ध कराने को इच्छुक है। लेकिन एमडीसी और संबंधित संस्थाएं सहयोग नहीं कर रही है।
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