दुनिया वाकई गोल है l कब क्या हो जाए, कह नहीं सकते l जो कल तक यार था कब दुश्मन बन जाए यह भी तय नहीं है l लेकिन हाल ही में अंतर्राष्ट्रीय घटना क्रम जिस रफ़्तार से बदला है उस पर सरसरी नज़र डालें तो जो पाकिस्तान अमेरिका को फूटी आँख नहीं भाता था, उसे अमेरिका की गोद में जगह मिल गई है और जिस अमेरिका के साथ हम दोस्ती की कसमें खाते थे उसने भारत को अपनी लिस्ट से बाहर कर दिया है l बेशक़, 25 फीसदी टेरिफ़ लगाने से भारत पर बोझ पड़ेगा लेकिन भारतीय खेलों के लिए एक बड़ा खतरा भी पैदा हो गया है l विशेषकर, 2036 के ओलम्पिक की मेजबानी पर संकट मंडराने लगा है l इसलिए क्योंकि माय डियर फ्रेंड नाराज हैं l
जैसा की विदित है कि खेल भी अब राजनीति का मैदान बन चुके है l बड़े छोटे सभी खेलों को अंतर्राष्ट्रीय राजनीति प्रभावित कर रही है l अमेरिका, चीन, जापान, जर्मनी, फ़्रांस, रूस आदि देश खेलों पर छाए हुए हैं l खासकर, अमेरिका और चीन जैसा चाहें, खेलों को अपनी उंगलियों पर नचा रहे हैं l चूंकि अब अमेरिका ने पाकिस्तान को अपना पक्का दोस्त मान लिया है और भारत से दूरियां बढ़ा ली हैं, ऐसे में भारत खेल जगत में अलग थलग पड़ सकता है l क्योंकि चीन से हमारी पटती नहीं, रूस लगातार दूर होता जा रहा है और अब अमेरिका भारत को खरी खरी सुना रहा हैl ऐसे में भारत की मेजबानी के मौके बहुत कम या बिल्कुल भी नहीं हैं l अर्थात ओलम्पिक आयोजित करने के भारतीय सपने पर ट्रम्प ने पानी फेर दिया है l
ट्रम्प की नाराजगी और ना का मतलब है कि अमेरिका के पिट्ठू और पिछलग्गू देश भी हमसे दूरी बना सकते हैं l पाकिस्तान उसका चहेता देश है तो भारत और रूस की अर्थव्यवस्था को अमेरिकी राष्ट्रपति ने ‘मृतवत’ कहकर भड़ास निकाली है l ऐसे में अमेरिका की कृपा पर पलने वाले देश भारतीय ओलम्पिक दावे के हक़ में वोट नहीं करेंगे l खासकर इस्लामिक देशों में से ज्यादातर पाकिस्तान और अमेरिका के साथ रहेंगे l कल तक जो भारत का प्रिय मित्र था, जिसकी कसमें अंतर्राष्ट्रीय मंच और भारतीय संसद में खाई जाती थीं उसने सरे आम कह दिया है, “वह दिन दूर नहीं जब भारत पाकिस्तान से तेल खरीदेगा “l अर्थात ओलम्पिक मेजबानी के दावे को बड़ा आघात पहुंचा है l ज़ाहिर है कोई चमत्कार ही भारत की ओलम्पिक दावेदारी के सपने को साकार कर सकता है l
![]() |
Rajender Sajwan, Senior, Sports Journalist |
