राष्ट्रपति मुर्मू ने राज्यसभा के लिए नामित किए चार प्रतिष्ठित चेहरे,

Presidant of india

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने हाल ही में राज्यसभा के लिए चार नए सदस्यों की मनोनयन प्रक्रिया पूरी की है। संविधान के अनुच्छेद 80(1)(क) के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए उन्होंने जिन व्यक्तित्वों को उच्च सदन में नामित किया है, वे अपने-अपने क्षेत्रों में ख्यातिप्राप्त हैं। इन नामांकनों से उन रिक्त स्थानों को भरा गया है जो पूर्व मनोनीत सदस्यों के कार्यकाल समाप्त होने के कारण खाली हुए थे।राज्यसभा में मनोनीत किए गए चारों सदस्यों में वरिष्ठ अधिवक्ता उज्ज्वल निकम, केरल के सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षक सी. सदानंदन मास्टर, पूर्व विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला और प्रख्यात इतिहासकार मीनाक्षी जैन शामिल हैं।

उज्ज्वल देवराव निकम देश के उन गिने-चुने अधिवक्ताओं में से हैं, जिन्होंने आतंकवाद और संगठित अपराध के मामलों में सरकार की ओर से बड़े स्तर पर पैरवी की है। मुंबई में 26/11 आतंकवादी हमलों से जुड़े मामलों में उन्होंने बतौर विशेष सरकारी वकील कोर्ट में सरकार का पक्ष मजबूती से रखा था। लंबे समय से न्यायिक क्षेत्र में सक्रिय निकम को भारतीय जनता पार्टी ने 2024 के आम चुनाव में मुंबई उत्तर मध्य से उम्मीदवार भी बनाया था। अब उन्हें राज्यसभा में भेजकर सरकार ने उनके योगदान को सम्मानित किया है।

हर्षवर्धन श्रृंगला भारतीय विदेश सेवा के उन अधिकारियों में गिने जाते हैं जिन्होंने कई अहम वैश्विक मोर्चों पर भारत का प्रतिनिधित्व किया है। वे संयुक्त राज्य अमेरिका, बांग्लादेश और थाईलैंड में भारत के राजदूत रह चुके हैं। 2023 में भारत की G20 अध्यक्षता के दौरान उन्हें इस महत्त्वपूर्ण कार्यक्रम का मुख्य समन्वयक नियुक्त किया गया था। उनके पास कूटनीति, रणनीति और वैश्विक संबंधों का गहरा अनुभव है, जिससे राज्यसभा को अब सीधा लाभ मिलेगा।

केरल के सी. सदानंदन मास्टर राजनीति और सामाजिक बदलाव की दिशा में एक सशक्त आवाज हैं। एक शिक्षक के रूप में करियर की शुरुआत करने वाले सदानंदन का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। वर्ष 1994 में एक राजनीतिक हमले में उनके दोनों पैर काट दिए गए थे। यह हमला कथित रूप से माकपा कार्यकर्ताओं द्वारा किया गया था। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और भारतीय जनता पार्टी के साथ सक्रिय राजनीति में भागीदारी जारी रखी। 2021 में उन्हें भाजपा ने विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी भी बनाया था। अब उच्च सदन में उनकी मौजूदगी संघर्षशील व्यक्तित्व की मिसाल होगी।

इतिहास और शिक्षा जगत की प्रख्यात विद्वान

प्रसिद्ध इतिहासकार और शिक्षाविद् डॉ. मीनाक्षी जैन को भी राज्यसभा के लिए मनोनीत किया गया है। भारतीय इतिहास, संस्कृति और सभ्यता के क्षेत्र में उन्होंने कई उल्लेखनीय शोध और लेखन कार्य किए हैं। उनका नाम इतिहास के क्षेत्र में गंभीर, संतुलित और तथ्य-आधारित लेखन के लिए जाना जाता है। वे भारतीय परंपरा और विचारधारा को अकादमिक स्तर पर प्रस्तुत करने की एक अहम आवाज हैं।इन चारों व्यक्तित्वों का राज्यसभा में नामांकन उच्च सदन की बौद्धिक क्षमता को समृद्ध करने वाला है। चाहे वह न्याय व्यवस्था हो, विदेश नीति, शिक्षा या सामाजिक संघर्ष—हर क्षेत्र से जुड़े इन विशेषज्ञों की मौजूदगी से संसद में बहस का स्तर और व्यापकता निश्चित रूप से बढ़ेगी। राष्ट्रपति द्वारा किया गया यह चयन उनके समावेशी दृष्टिकोण और प्रतिष्ठित क्षेत्रों के अनुभवी व्यक्तियों को राष्ट्रीय मंच देने की मंशा को दर्शाता है।

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