देर से ही सही, सालों बाद भारतीय फुटबाल क़े लिए यह खुशखबरी आई है कि हमारी महिला टीम एएफसी एशियन कप क़े मुख्य दौर में स्थान बनाने में सफल हो गई है l अर्थात महाद्वीप की प्रमुख टीमों में हमारी लड़कियों ने स्थान बना लिया है l बेशक़, सालों बाद भारतीय फुटबाल को चहकने का मौका मिला है l वरना पिछले कई सालों में लगातार हार क़े चलते शर्मसार होते आए हैं l थाईलैंड को हराने का करिश्मा भी पहली बार किया है l
यह सही है कि ग्रुप मुकाबलों में भारत को बेहद कमजोर टीमों का सामना करना पड़ा l मंगोलिया तिमोर लेसले और इराक को आसानी से छकाने क़े बाद ग्रुप क़े निर्णायक मुकाबले में थाईलैंड पर मिली संघर्षपूर्ण जीत अभूतपूर्व रही l ऐसी कामयाबी की भारतीय फुटबाल को वर्षों से ज़रूरत थी l इसलिए क्योंकि पुरुष प्रधान माने जाने वाले खेल में पुरुष खिलाड़ियों ने भारतीय फुटबाल को लानत और अपयश क़े शीर्ष तक पहुंचा दिया है l एक जमाना था जब भारत में महिला फुटबाल अजन्मी अवस्था में थी और पुरुष फुटबाल क़े प्रमुख देशों में शामिल हो चुके थे l लेकिन धीरे धीरे महिला फुटबाल ने प्रवेश किया और पुरुषों का कद घटता चला गया l आज आलम यह है कि महिला खिलाड़ियों ने देर से ही सही, पुरुषों से बेहतर प्रदर्शन शुरू कर दिया है l हालांकि तिमोर लेसले, मांगोलीया और इराक की महिला खिलाड़ियों ने अभी फुटबाल का पहला पाठ भी ढंग से नहीं सीखा है लेकिन थाईलैंड क़े विरुद्ध किया गया प्रदर्शन दर्शाता है कि हमारी महिलाएं टाइगरेस कहलाने की हकदार हैँ और प्रगति की रफ़्तार बनी रही तो महिलाएं पुरुषों से पहले वर्ल्ड कप खेल जाएंगी l फ़िरभी अभी से कोई भविष्यवाणी करना ठीक नहीं होगा पुरुष तो शायद सौ सालों में भी वर्ल्ड कप ना खेल पाएं l
बेशक़, जीत का बड़ा श्रेय खिलाड़ी, कोच और सपोर्ट स्टॉफ को जाता है l देखना यह होगा कि महिला खिलाड़ी कब तक. अपना श्रेष्ठ बनाए रख पाती हैं और क्या पुरुष खिलाड़ी महिलाओं क़े प्रदर्शन से कोई सबक ले पाएंगे? उम्मीद है कि भारतीय फुटबाल आका पुरुष टीम को सिर चढ़ाने और उस पर करोड़ों लुटाने के साथ महिला टीम और खिलाड़ियों की तरफ भी ध्यान देंगे l
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Rajender Sajwan, Senior, Sports Journalist |
