भारत की सेना को सबसे मजबूत सेनाओं की लिस्ट में शामिल किया जाता है। चाहे वह वायु सेना हो, जल सेना या फिर थल सेना हो। और इसी कड़ी में लगातार भारत सरकार काम कर रही है जिससे सभी विभाग के सेनाओं को और मजबूत किया जा सके। बता दे कि भारत की समुद्री सुरक्षा और ताकत को एक नया ताकत मिलने जा रहा है। आज भारतीय नौसेना में एक अत्याधुनिक स्टेल्थ युद्धपोत, आईएनएस तमाल, औपचारिक रूप से शामिल किया जाएगा। रूस के कालिनिनग्राद में तैयार हुआ यह जहाज ना केवल तकनीकी रूप से उन्नत है बल्कि इसकी आक्रामक मारक क्षमता इसे दुश्मनों के लिए समुद्र में एक खतरनाक चुनौती बनाती है। इसे पश्चिमी नौसेना कमान के प्रमुख वाइस एडमिरल संजय जे. सिंह की उपस्थिति में कमीशन किया जाएगा। इस कार्यक्रम में भारत और रूस के कई वरिष्ठ रक्षा अधिकारी भाग लेंगे।आईएनएस तमाल को सिर्फ एक युद्धपोत कहना इसके प्रभाव को कम आंकना होगा। यह एक ऐसा समुद्री योद्धा है जिसे नवीनतम हथियार प्रणालियों और तकनीक से लैस किया गया है। इसका नाम पौराणिक योद्धा इंद्र की तलवार पर रखा गया है, जो उसकी आक्रामकता और निर्णायक क्षमता का प्रतीक है। इसकी मारकता की सबसे बड़ी मिसाल ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, जो पलक झपकते ही समंदर या जमीन पर मौजूद दुश्मन को नेस्तनाबूद कर सकती है।
हर दिशा से सुरक्षा, हर खतरे का जवाब
आईएनएस तमाल न केवल हमले में सक्षम है, बल्कि यह हर तरह की सुरक्षा प्रणाली से भी सुसज्जित है। इसमें नई पीढ़ी की वर्टिकल लॉन्च मिसाइलें लगी हैं, जो हवा से आने वाले खतरों को नाकाम करने की ताकत रखती हैं। साथ ही इसमें एंटी-सबमरीन रॉकेट और टॉरपीडो लगे हैं जो किसी भी पनडुब्बी हमले का जवाब देने में पूरी तरह सक्षम हैं। इसके अतिरिक्त, 100 मिमी की मुख्य तोप और 30 मिमी की क्लोज-इन वेपन सिस्टम किसी भी नजदीकी खतरे का त्वरित और सटीक प्रतिकार कर सकते हैं।
हवाई हमलों से निगरानी और कार्रवाई की क्षमता
जहाज पर लगे अत्याधुनिक रडार और सोनार प्रणाली समुद्र में चल रही हर गतिविधि पर निगाह बनाए रखते हैं। इसके अलावा, यह पोत मल्टी-रोल हेलिकॉप्टरों को ऑपरेट करने में सक्षम है, जिससे इसकी निगरानी और हमला करने की सीमा कई गुना बढ़ जाती है। यह विशेषता इसे बहुआयामी बनाती है – एक ऐसा प्लेटफॉर्म जो जल, थल और आकाश – तीनों मोर्चों पर प्रभावी कार्रवाई कर सकता है। साथ ही आपको बता दे कि आईएनएस तमाल को भारतीय नौसेना के पश्चिमी बेड़े का हिस्सा बनाया जाएगा, जिसे ‘स्वॉर्ड आर्म ऑफ द नेवी’ कहा जाता है। यह भारत की समुद्री रणनीति में निर्णायक बदलाव लाने वाला प्लेटफॉर्म साबित हो सकता है। इससे न केवल भारतीय नौसेना की ताकत बढ़ेगी, बल्कि हिन्द महासागर में भारत की मौजूदगी भी और अधिक मज़बूत और भरोसेमंद हो जाएगी।
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