प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बैंक धोखाधड़ी के एक बड़े मामले में कार्रवाई करते हुए दिल्ली-एनसीआर और पंजाब के लुधियाना में एक साथ 10 अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी की है। यह कार्रवाई 988 करोड़ रुपये के एक घोटाले के सिलसिले में की गई, जो शिल्पी केबल्स टेक्नोलॉजीज लिमिटेड (SCTL) से जुड़ा हुआ है। यह मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की एक एफआईआर पर आधारित है, जिसमें गंभीर बैंकिंग अनियमितताओं की बात सामने आई है।
IDBI सहित कई बैंकों से की गई थी धोखाधड़ी
जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस घोटाले में IDBI बैंक समेत कई अन्य बैंकों को निशाना बनाया गया। आरोप है कि कंपनी के प्रमोटर मनीष गोयल और उनके सहयोगियों ने बैंकों से लिए गए कर्ज को फर्जी कारोबार और लेन-देन के माध्यम से विदेशों में ट्रांसफर कर दिया। ED की पड़ताल में यह भी सामने आया है कि मनीष गोयल कुछ यूनिट्स को गैरकानूनी रूप से संचालित कर रहे थे, जिनका उद्देश्य सिर्फ पैसों की हेराफेरी था। बता दे कि जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि मनीष गोयल के साथ जुड़े कुछ पूर्व पदाधिकारी फर्जी कंपनियों के जरिये नकद निवेश करने में संलिप्त थे। यह निवेश जानबूझकर ऐसी कंपनियों में किया गया था जो सीधे तौर पर मनीष गोयल को लाभ पहुंचा रही थीं। इन लेन-देन के पीछे मकसद बैंक से मिले फंड को सफेद दिखाकर निजी मुनाफा कमाना था।
लेटर ऑफ क्रेडिट और विदेशी ट्रांजैक्शन का गलत इस्तेमाल
इस पूरे घोटाले में लेटर ऑफ क्रेडिट (LC) के दुरुपयोग का मामला भी सामने आया है। आरोप है कि इसके जरिए फर्जी दस्तावेज बनाकर करोड़ों रुपये के फंड को विदेशों में ट्रांसफर किया गया। कई लेन-देन सिर्फ कागजों पर दिखाए गए थे, जबकि असल में कोई व्यापारिक गतिविधि नहीं हुई थी। विदेशी कंपनियों के नाम पर इन पैसों को हड़प लिया गया।तो वहीं प्रवर्तन निदेशालय की यह छापेमारी फिलहाल जारी है और एजेंसी को उम्मीद है कि जांच के दौरान डिजिटल डेटा, बैंकिंग दस्तावेज और संपत्तियों से जुड़े कई अहम सुराग हाथ लग सकते हैं। ये साक्ष्य न केवल इस धोखाधड़ी के नेटवर्क को सामने लाएंगे, बल्कि इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका भी स्पष्ट कर सकते हैं।यह मामला एक बार फिर से यह साबित करता है कि फर्जीवाड़े और आर्थिक अपराधों के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियां अब तेजी से और सख्ती से कार्रवाई कर रही हैं।
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