that era

वो ज़माना

न रहा वो फूलों का खिलना न रहा उसका खिड़की पर आना न रहा वो नुक्कड़ में मिलना न रहा वो मौसम आशिक़ाना न रहा मिलके आगन में गाना न रहा वो दोस्तों का ठिकाना न रहा वो खेला गलियों Read more